रास्ता
उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ से दंतेवाड़ा जाने वाले लोगों को अब जगदलपुर नहीं जाना पड़ेगा। अब माँ दंतेश्वरी का आशीर्वाद लेने के लिए यात्री जगदलपुर से करीब 40 किलोमीटर और बस्तर से करीब 18 किलोमीटर पहले भानपुरी - चित्रकूट मार्ग का उपयोग कर पहले चित्रकूट झरना वाला मार्ग और फिर जगदलपुर-गीदम मार्ग का उपयोग कर दंतेवाड़ा पहुंच सकते हैं। ये मार्ग की दूरी भी काम है और श्रद्धालुआं का टोल भी बचेगा। आधे से अधिक रास्ता डबल लेन है और बाकि सिंगल लेन है। 95% मार्ग अच्छा है। केवल पत्थर खदानों के पास थोड़े गड्ढे हैं। रास्ता खूबसूरत बहुत है। चरों ओर पहाड़ियां और खेत है। बीच में रुक कर खाना भी खाया जा सकता है। आप से अपील कि गंदगी न फैलाएं।
पार्किंग
पार्किंग की व्यवस्था हाई स्कूल मैदान में की गई है। पुरे रस्ते में पुलिस खड़ी हुई है श्रद्धालुओं को रास्ता दिखाने के लिए। कार को तो हाई स्कूल में ही खड़ा करना पड़ता है, दो पहिया वाहनों को लोग आस पास की गलियों में लगा देते हैं।
जूते मंदिर परिसर से बाहर
श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में जूते - चप्पल पहन कर जाने की अनुमति नहीं है। माँ दंतेश्वरी मंदिर के मुख्यद्वार के सामने जूते चप्पल रखने के लिए एक टेंट लगाया गया है जिसमे पंखे भी लगाए गए हैं।
कोरोना प्रोटोकॉल का पालन
माँ दंतेश्वरी के दर्शन के लिए कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए मास्क ज़रूरी है। पुलिस और मंदिर के वालंटियर आपको हर जगह मास्क ठीक से लगाने के लिए टोकेंगे। श्रद्धालुओं के पास वैक्सीन के दोनो डोज का सर्टिफिकेट या 2 दिन पहले के आरटी पीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट होनी चाहिए। ये आपके लिए और अन्य श्रद्धालुओं की सेहत के लिए ज़रूरी है। मंदिर परिसर में प्रवेश के वक़्त आपके हाथों पर सैनिटाइजर डाला जायेगा
दान
माँ दंतेश्वरी मंदिर में दानपेटी के साथ साथ ऑनलाइन दान करने की भी सुविधा है। श्रद्धालु यूपीआइ के माध्यम से भी दान कर सकते हैं। मंदिर परिसर में जगह जगह मंदिर समिति के UPI ID का QR Code लगाया गया है जिसे स्कैन करने पर आप किसी भी UPI app से दान कर सकते हैं। माँ दंतेश्वरी मंदिर समिति की UPI ID है: danteshwaritemple@sbi
प्रसाद
दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद में नि:शुल्क खिचड़ी दी जा रही है। श्रद्धालु चाहें तो 50 व 100 रुपए के पैकेट में पैक महुआ के लड्डू भी ख़रीद सकते हैं।
सामान्य श्रद्धालु बनाम "ख़ास श्रद्धालु"
सामान्य श्रद्धालुओं को एक कतार में जाना पड़ता है। "खास श्रद्धालुओं" की गाड़ी मंदिर परिसर के अंदर जाती है।
सामान्य श्रद्धालुओं के जूते मंदिर परिसर से बाहर रखे जाते हैं, "खास श्रद्धालुओं" और उनके साथ जाने वाले सिक्योरिटी गार्ड की बंदूक और जूते परिसर के अंदर जाते हैं। ये हमने अपनी आँखों से देखा है। एक स्कार्पियो कार जिसकी नंबर प्लेट के ऊपर एक प्रशासनिक ओहदे का नाम लिखा हुआ था और उसके साथ एक फॉर्चूनर कार मंदिर परिसर में दाखिल हुई। स्कार्पियो में से एक पतला और लम्बा व्यक्ति उतरा जिसके साथ सिक्योरिटी गार्ड भी उतरे। फॉर्चूनर कार में से महिलाएं और बुज़ुर्ग उतरे। सभी लोग एक दूसरे रस्ते से सीधा मंदिर की ओर चले गए। सामान्य श्रद्धालु कतार में ही खड़े रह गए।
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